गुरुवार, 20 फ़रवरी 2025
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 धारा 206
रविवार, 8 दिसंबर 2024
राजस्व लेखपाल उपेक्षित कर्मचारी
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 धारा 220
शनिवार, 19 अक्टूबर 2024
लेखपाल की नौकरी तथा उनकी पीड़ा
मंगलवार, 15 अक्टूबर 2024
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता अध्याय 2
राजस्व संहिता 2006 अध्याय-दो
राजस्व मण्डल
में राज्य का राजस्व क्षेत्रों में विभाजन-इस संहिता के प्रयोजनों के लिए, राज्य को राजस्व क्षेत्रों में विभाजित किया जाएगा जो मंडलों में विभक्त होगा जिसमें दो या अधिक ज़िले हो सकेंगे और प्रत्येक ज़िला में दो या अधिक तहसीलें हो सकेंगी और प्रत्येक तहसील में एक या अधिक परगनें हो सकेंगे और प्रत्येक परगना में दो या इससे अधिक गांव हो सकेंगे।
राजस्व क्षेत्रों का गठन–
(1) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा निम्नलिखित को विनिर्दिष्ट कर सकती है।
(एक) उन जिलों को जिनसे मिलकर कोई मण्डल बनता हो; (दो) उन तहसीलों को जिनसे मिलकर कोई ज़िला बनता हो;
(तीन) उन गांवों को जिनसे मिलकर कोई तहसील बनती हो।
(2) राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी राजस्व क्षेत्र की सीमाओं को समामेलित, पुनःसमायोजित, विभाजित करके या किसी अन्य रीति से, वह चाहे जो भी हो, परिवर्तित कर सकती है या किसी ऐसे राजस्व क्षेत्र को समाप्त कर सकती है और किसी ऐसे राजस्व क्षेत्र का नामकरण कर सकती है
और उसके नाम में परिवर्तन कर सकती है और यदि जहाँ किसी क्षेत्र का पुनः नामकरण कर दिया जाए, तो वहाँ उक्त क्षेत्र के किसी विधि या लिखत या अन्य दस्तावेज में उसके मौलिक नाम से किए गए निर्देशों को, जब तक कि अभिव्यक्त रूप से अन्यथा उपबन्धित न किया जाए, पुन: नामकरण किए गए क्षेत्र का निर्देश समझा जाएगा :
परन्तु किसी राजस्व क्षेत्र की सीमाओं को परिवर्तित करने के किसी प्रस्ताव पर इस उपधारा के अधीन कोई आदेश पारित करने के पूर्व राज्य सरकार आपत्तियाँ आमंत्रित करने के लिए ऐसे प्रस्तावों को विहित रूप से प्रकाशित करेगी और ऐसे प्रस्तावों के सम्बन्ध में की गई आपत्तियों पर विचार करेगी।
(3) कलेक्टर विहित रूप में प्रकाशित किसी आदेश द्वारा तहसील के गांवों को लेखपाल हलकों में और लेखपाल हलकों को राजस्व निरीक्षक हलकों में व्यवस्थित करेगा और प्रत्येक राजस्व निरीक्षक के मुख्यालय को भी उसके हल्के के भीतर विनिर्दिष्ट करेगा।
(4) इस संहिता के प्रारम्भ होने के समय यथा विद्यमान मण्डल, ज़िले, तहसील, परगने, राजस्व निरीक्षक हलके, लेखपाल हलके और गांव, जब तक कि पूर्ववर्ती उपखण्डों में उनमें कोई परिवर्तन न कर दिया जाए, इस धारा के अधीन विनिर्दिष्ट राजस्व क्षेत्र समझे जायेंगे।
सोमवार, 23 मई 2022
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 धारा 221
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 धारा 219
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 धारा 218
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 धारा 228
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 धारा 227
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 धारा 239
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 धारा 230
गुरुवार, 2 दिसंबर 2021
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता अध्याय 1
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006
(उ0प्र0 अधिनियम सं0 8, सन् 2012) (उ0प्र0 अध्यादेश सं0 4 सन् 2015 के द्वारा यथासंशोधित)
संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-
(1) यह अधिनियम उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 कहा जाएगा।
(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश में होगा।
(3) यह ऐसे दिनांक को प्रवृत्त होगा जैसा राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा नियत करे और विभिन्न क्षेत्रों के लिए या इस संहिता के विभिन्न उपबन्धों के लिए विभिन्न दिनांक नियत किये जा सकते हैं। संहिता का लागू होना- इस संहिता के उपबन्ध, अध्याय आठ और नौ को छोड़कर, संपूर्ण उत्तर प्रदेश में लागू होंगे और अध्याय आठ और नौ ऐसे क्षेत्रों में लागू होंगे जिन पर प्रथम अनुसूची के क्रम संख्या 19 और 25 पर विनिर्दिष्ट कोई अधिनियम इस संहिता द्वारा उनके निरसन के ठीक पूर्ववर्ती दिनांक को लागू था। संहिता का नए क्षेत्रों में विस्तार- (1) जहाँ इस संहिता के प्रारम्भ होने के पश्चात उत्तर प्रदेश के राज्य क्षेत्र में कोई क्षेत्र सम्मिलित किया जाए, वहाँ राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा ऐसे क्षेत्र में इस संहिता का संपूर्ण या कोई उपबन्ध विस्तारित कर सकती है।
(2) जहाँ उपधारा (1) के अधीन कोई अधिसूचना जारी की जाए, वहाँ उक्त उपधारा में विनिर्दिष्ट क्षेत्र में प्रवृत्त किसी अधिनियम, नियम या विनियम के उपबन्ध जो इस प्रकार लागू किए गये उपबन्धों से असंगत हो, निरसित हुए समझे जायेगें।
(3) राज्य सरकार किसी पश्चातवर्ती अधिसूचना द्वारा उपधारा (1) के अधीन जारी किसी अधिसूचना में संशोधन, उपान्तरण या परिवर्तन कर सकती है। परिभाषाएँ- इस संहिता में :
(1) आबादी" या "ग्रामीण आबादी' का तात्पर्य किसी ग्राम के ऐसे क्षेत्र से है जिसका उपयोग इस संहिता के प्रारम्भ होने के दिनांक को उसके निवासियों के आवास के प्रयोजनों के लिए या उसके सहायक प्रयोजनों यथा, सहन व हरे वृक्षों, कुआँ आदि के लिए किया जा रहा हो या जिसे एतद्पश्चात ऐसे प्रयोजन के लिए आरक्षित किया गया हो या किया जाए ;
(2) "कृषि' के अन्तर्गत बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, फूलों की खेती, मधुमक्खी पालन और कुक्कुट पालन भी है ;
(3) “कृषि श्रमिक' का तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जिसकी जीविका का मुख्य स्त्रोत कृषि भूमि पर शारीरिक श्रम है ;
(4) "बैंक" का तात्पर्य वही होगा जो उत्तर प्रदेश साहूकारी विनियमन अधिनियम, 1976 में उसके लिये दिया गया है:
(5) "भूमि प्रबन्धक समिति' का तात्पर्य उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा 28-क के अधीन गठित किसी भूमि प्रबन्धक समिति से है ;
(6) "परिषद" का तात्पर्य धारा 7 के अधीन गठित या गठित समझे जाने वाले राजस्व परिषद से है ;
(7) "पूर्त संस्था” का तात्पर्य किसी पूर्त प्रयोजन के लिये गठित किसी अधिष्ठान, उपक्रम, संगठन या संघ से है और उसके अन्तर्गत कोई विनिर्दिष्ट विन्यास भी है;
(8) "कलेक्टर" का तात्पर्य धारा 12 की उपधारा (1) के अधीन राज्य सरकार द्वारा इस रूप में नियुक्त किसी अधिकारी से है और उसके अन्तर्गत निम्नलिखित भी होंगे,
(क) उक्त धारा की उपधारा (2) के अधीन राज्य सरकार द्वारा नियुक्त कोई अपर कलेक्टर ; और
(ख) इस संहिता के अधीन कलेक्टर के सभी या किन्हीं कृत्यों का निष्पादन करने के लिये राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा, सशक्त प्रथम श्रेणी का असिस्टेन्ट कलेक्टर ;
(9) "संचित गांव निधि' का तात्पर्य धारा 69 के अधीन गठित संचित गांव निधि से है ;
(10) किसी भू-खातेदार के सम्बन्ध में "परिवार" का तात्पर्य यथास्थिति स्वयं पुरूष या स्त्री और उसकी पत्नी या उसका पति (न्यायिक रूप से पृथक पत्नी या पति से भिन्न) अवयस्क पुत्रों, और विवाहित पुत्रियों से भिन्न अवयस्क पुत्रियों से है :
परन्तु जहाँ प्रश्न किसी भूमि के अन्तरण से सम्बन्धित हो और अन्तरिती अवयस्क हो वहाँ पद "परिवार" के अन्तर्गत ऐसे अवयस्क के माता-पिता होंगे;
(11) "बाग-भूमि” का तात्पर्य किसी जोत में भूमि के किसी विनिर्दिष्ट भाग से है जिसमें इस प्रकार वृक्ष लगे हों (जिसमें पपीता या केला के पौधे सम्मिलित नहीं हैं) कि वे किसी भूमि को या उसके किसी समुचित भाग को किसी अन्य प्रयोजन के लिये उपयोग में लाए जाने से रोकते हों, या पूर्ण रूप से विकसित होने पर रोकेंगे और ऐसी भूमि पर लगे वृक्ष एक बाग का रूप धारण करेंगे ;
(12) "जोत" का तात्पर्य एक भू-खातेदारी, एक पट्टे, वचनबद्ध या अनुदान के अधीन रखे गये भूमि के किसी खण्ड से है ;
(13) किसी जोत के सम्बन्ध में "सुधार" का तात्पर्य ऐसे किसी संकर्म से है जिससे जोत के मूल्य में भौतिक रूप से अभिवृद्धि होती हो और जो उसके लिए उपयुक्त हो और उस प्रयोजन के सुसंगत हो जिस हेतु उसे रखा गया हो और जो यदि जोत पर निष्पादित न किया जाए, उसके लाभ के लिए या तो प्रत्यक्ष रूप से सम्पादित किया जाता हो या सम्पादन के पश्चात उसके लिए प्रत्यक्ष रूप से लाभप्रद बनाया जाता हो और पूर्ववर्ती उपबन्धों के अधीन उसके अन्तर्गत निम्नलिखित संकर्म भी हैं
(एक) कृषि प्रयोजनों के लिये जल के भण्डारण, आपूर्ति या वितरण के लिए तालाबों, कुओं, जल-प्रणालियों, तटबन्धों का निर्माण और अन्य कार्य ;
(दो) भूमि के जल-निकास हेतु या बाढ़ से या जल से भूमि के कटाव या अन्य क्षति से भूमि की रक्षा हेतु निर्माण कार्य ;
(तीन) वृक्षारोपण करना, भूमि को कृषि योग्य बनाना, घेराबन्दी करना, समतल अथवा सीढ़ीदार बनाना;
(चार) आबादी या नगरीय क्षेत्र को छोड़कर अन्यत्र जोत के आस-पास जोत के सुविधाजनक या लाभप्रद उपयोग या अध्यासन के लिए आवश्यक भवनों का निर्माण ; और
(पाँच) पूर्वोक्त संकर्मो में से किसी संकर्म का नवीकरण या पुनर्निर्माण या उसमें परिवर्तन या उसका परिवर्धन ;
(14) "भूमि" का तात्पर्य, अध्याय सात और आठ और धारा 80, 81 और धारा 136 के सिवाय, ऐसी भूमि से है जो कृषि से सम्बद्ध प्रयोजनों के लिये धृत या अध्यासित हो ;
(15) "भूमि धारक” का तात्पर्य, ऐसे व्यक्ति से है जिसे लगान देय हो या देय होती यदि कोई स्पष्ट या विवक्षित संविदा न होती ;
(16) "राजस्व न्यायालय” का तात्पर्य, निम्नलिखित प्राधिकारियों में से सभी या किसी प्राधिकारी, (नामस्वरूप) परिषद और उसके सभी सदस्य, आयुक्त, अपर आयुक्त, कलेक्टर, अपर कलेक्टर, मुख्य राजस्व अधिकारी, असिस्टेन्ट कलेक्टर, बन्दोबस्त अधिकारी, सहायक बन्दोबस्त अधिकारी, अभिलेख अधिकारी, सहायक अभिलेख अधिकारी, तहसीलदार, तहसीलदार (न्यायिक) और नायब तहसीलदार से है ;
(17) “राजस्व अधिकारी" का तात्पर्य आयुक्त, अपर आयुक्त, कलेक्टर, अपर कलेक्टर, मुख्य राजस्व अधिकारी, उप जिलाधिकारी, सहायक कलेक्टर, बन्दोबस्त अधिकारी, सहायक बन्दोबस्त अधिकारी, अभिलेख अधिकारी, सहायक अभिलेख अधिकारी, तहसीलदार, तहसीलदार (न्यायिक), नायब तहसीलदार और राजस्व निरीक्षक से है ;
(18) "उप जिलाधिकारी" का तात्पर्य, तहसील के प्रभारी असिस्टेन्ट कलेक्टर से है ;
(19) "टौंगिया रोपवनी' का तात्पर्य, ऐसी वनरोपण प्रणाली से है जिसके पहले चरण में वृक्षारोपण कृषि फसल के उगाने के साथ-साथ किया जाता है जिसमें फसल का विकास इस प्रकार रोपित वृक्षों द्वारा फैलाव बनाने पर रूक जाता है जिससे कृषि फसल की खेती असंभव हो जाती है ;
(20) "गांवका तात्पर्य, किसी ऐसे स्थानीय क्षेत्र से है, जो चाहे घना हो या नहीं, तत्सम्बन्धी जिले के राजस्व अभिलेख में गांव के रूप में अभिलिखित हो और उसके अन्तर्गत ऐसा क्षेत्र भी है जिसे राज्य सरकार सामान्य या विशेष अधिसूचना द्वारा गांव के रूप में घोषित करे ;
(21) "गांव शिल्पी' का तात्पर्य, ऐसे व्यक्ति से है जिसकी जीविका का मुख्य स्त्रोत कृषि या उसके आनुषंगिक प्रयोजनों के लिये प्रयोग में लाए जाने वाले परम्परागत औजारों-उपकरणों और अन्य सामानों या वस्तुओं का निर्माण या मरम्मत है और उसके अन्तर्गत बढ़ई, बुनकर, कुम्हार, लोहार, रजतकार, सुनार, नाई, धोबी, मोची या ऐसा कोई अन्य व्यक्ति भी है जो सामान्यतः किसी गांव में अपने परिश्रम से या अपने परिवार के किसी सदस्य के परिश्रम से शिल्पकारी करके अपनी जीविका का अर्जन करता है ;
(22) शब्द और पद "गांव निधि", "ग्राम सभा” और “ग्राम पंचायत" के वही अर्थ होंगे जो उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 में उनके लिए दिए गये हैं;
(23) 'कृषि वर्ष' का तात्पर्य ऐसे वर्ष से है जो कैलेण्डर वर्ष में जुलाई के प्रथम दिन से आरम्भ होकर जून के तीसवें दिन पर समाप्त होता है। इसे ‘फसली वर्ष' भी कहा जाता है;
(24) 'मध्यवर्ती का तात्पर्य, जब उसका सम्बन्ध किसी आस्थान से हो, उक्त आस्थान या उसके किसी भाग के स्वामी, मातहतदार, अदना मालिक, ठेकेदार, अवध के पट्टेदार दवामी या इस्तमरारी और दवामी काश्तकार से है;
(25) ‘पट्टा' के अन्तर्गत, जब उसका सम्बन्ध खानों या खनिज पदार्थों से हो, शिकमी पट्टा, अन्वेषण पट्टा
और पट्टा देने या शिकमी उठाने के अनुबन्ध भी हैं और ‘पट्टेदार' की भी व्याख्या तद्नुसार ही की जाएगी;
(26) 'डिक्री' का वही अर्थ होगा, जो सिविल प्रकिया संहिता, 1908 (अधिनियम संख्या 5, सन् 1908) की धारा 2 में इसके लिए समनुदेशित है;
(27) 'राज्य सरकार का तात्पर्य उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार से है;
(28) 'केन्द्रीय सरकार' का अर्थ होगा, जो साधारण खण्ड अधिनियम, 1897 (अधिनियम संख्या 10, सन् 1897) की धारा 3 में इसके लिए समनुदेशित है;
(29) 'मिनजुमला संख्या का तात्पर्य सैद्धान्तिक रूप से विभाजित लेकिन भौतिक रूप से अविभाजित खेत के जुज भाग को इंगित करने वाली 'शजरा संख्या' से है।
रविवार, 28 नवंबर 2021
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 धारा 103
सोमवार, 25 मार्च 2019
सोमवार, 6 अगस्त 2018
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2016 धारा 50
अधिकार अभिलेख को अन्तिम रूप देना- धारा 49 के अनुसार मानचित्र या अभिलेख का पुनरीक्षण करने के पश्चात् सहायक अभिलेख अधिकारी अपने दिनांक युक्त हस्ताक्षर से अधिकार अभिलेख (खतौनी) की पुष्टि करेगा या उसमें संशोधन करेगा।।
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2016 धारा 49
मानचित्र और अभिल ेख क े पुनरीक्षण की प्रक्रिया- (1) धारा 46 और 47 क े अधीन मानचित्र और अभिलेख का पुनरीक्षण करन े के लिय े अभिलेख अधिकारी उपधारा (2) स े (8) क े उपबन्धा ें के अधीन रहते हुए विहित प्रक्रिया के अनुसार सर्वेक्षण, मानचित्र में स ुधार, खेतवार पड़ताल और चालू अधिकार अभिलेख (खतौनी) का परीक्षण और सत्यापन करायेगा। (2) चालू अधिकार अभिलेख का परीक्षण और सत्यापन हो जाने क े पश्चात् नायब तहसीलदार ऐस े अभिल ेख में लेखन सम्बन्धी भूलों और गलतिया ें को, यदि कोई हो, शुद्ध करेगा और स ंबद्ध खातेदारो ं और अन्य हितबद्ध व्यक्तियों को नोटिस जारी कराय ेगा जिसमे ं चालू अधिकार अभिलेख और ऐस े अन्य अभिलेख स े, जो विहित किया जाए, स ुस ंगत उद्धरण दिए जायेंगे, जिसम ें भूमि के सम्बन्ध में उनक े अधिकार और दायित्व और उपधारा (1) म ें उल्लिखित क्रियाओं क े दौरान उनमें पायी गयी भ ूला ें और विवादों का उल्ल ेख किया जाय ेगा। (3) कोई व्यक्ति जिस े उपधारा (2) क े अधीन ना ेटिस जारी की गयी हो, नोटिस की प्राप्ति क े दिनांक स े इक्कीस दिन क े भीतर नायब तहसीलदार के समक्ष उसके सम्बन्ध में आपत्तियां प्रस्तुत कर सकता है, जिसम ें ऐस े अभिलेख या उद्धरण की प्रविष्टियों की शुद्धता या उसके प्रकार पर विवाद प्रकट किया गया हो। (4) भूमि म ें हितबद्ध कोई व्यक्ति उपधारा (5) के अनुसार विवाद क े तय किय े जान े के पूर्व किसी समय नायब तहसीदार के समक्ष या उपधारा (6) के अनुसार आपत्तियों का विनिश्चय किए जाने के पूर्व किसी समय सहायक अभिलेख अधिकारी के समक्ष आपत्ति प्रस्तुत कर सकता है। (5) नायब तहसीलदार - (क) जहा ं उपधारा (3) और उपधारा (4) के अनुसार आपत्तियां प्रस्तुत की जायं, वहाँ सम्बद्ध पक्षकारा ें को स ुनवाई करने के पश्चात; और (ख) किसी अन्य स्थिति म ें, ऐसी जाँच करन े के पश्चात, जिस े वह आवश्यक समझ े; भ ूल का स ुधार कर ेगा और अपने समक्ष उपस्थित हा ेन े वाले पक्षकारों के बीच समझौता द्वारा विवाद का निपटारा कर ेगा और ऐस े समझौत े क े आधार पर आदेश देगा। (6) ऐस े समस्त मामलों का अभिलेख, जिनका निस्तारण, नायब तहसीलदार द्वारा उपधारा (5) की अपेक्षानुसार, समझौता द्वारा नहीं किया जा सकता, सहायक अभिलेख अधिकारी को भ ेज दिया जाएगा जो उनका निस्तारण धारा 24 में निर्धारित प्रक्रिया क े अनुसार करेगा, और जहाँ विवाद में हक का प्रश्न अन्तर्गस्त हो वहाँ वह उसका विनिश्चय सरसरी तौर पर जाँच करन े के पश्चात करेगा। (7) जहा ँ उपधारा (6) के अधीन सरसरी तौर पर जाँच करने क े पश्चात सहायक अभिलेख अधिकारी का समाधान हा े जाए कि विवादग्रस्त भूमि राज्य सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकारी की है, वहाँ ऐसी भ ूमि पर अप्राधिकृत अध्यासन रखने वाले व्यक्ति का े बेदखल करायेगा और इस प्रयोजन के लिये ऐस े बल का प्रयोग कर सकता है या करा सकता है जो आवश्यक हो। (8) उपधारा (6) या उपधारा (7) के अधीन सहायक अभिलेख अधिकारी द्वारा दिये गये किसी आद ेश स े व्यथित कोई व्यक्ति ऐस े आदेश के दिन ंाक स े तीस दिन क े भीतर, विहित रीति स े अभिलेख अधिकारी का े अपील कर सकता है, और अभिलेख अधिकारी का ए ेसी अपील पर प्रत्येक आदेश, धारा-210 के उपबन्धो के अधीन रहते हुए अंतिम होगा।
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अंतरण के मामलों में नामांतरण:-- (1)धारा 33 या धारा 34 के अधीन किसी रिपोर्ट या तथ्य की जानकारी प्राप्त होने पर तहसीलदार एक उद्घोषणा जारी क...
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कतिपय वादों का विवर्जन:-- उत्तराधिकार या अंतरण द्वारा किसी भूमि का कब्जा प्राप्त करने के किसी व्यक्ति के आवेदन पर किसी राजस्व न्यायालय में...